बॉलीवुड अभिनेत्री जीनत अमान और उद्धव ठाकरे का मिला समर्थन
नई दिल्ली, संवाददाता : देश की परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन बुधवार को 18वें दिन भी लगातार जारी रहा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन के लंबे खींचने के साथ ही अब सरकार पर बातचीत शुरू करने का चौतरफा दबाव बढ़ता जा रहा है। वांगचुक और उनके समर्थक परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने और धांधली के दोषियों के खिलाफ सख्त जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हैं।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन का 25वां दिन
सोनम वांगचुक का यह अनिश्चितकालीन अनशन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले आयोजित व्यापक आंदोलन का हिस्सा है, जो अब अपने 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि हाल ही में आयोजित हुई NEET (UG) 2026 समेत देश की कई अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएं हुई हैं। इन गड़बड़ियों के कारण लाखों होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
मांसपेशियों और बीपी पर पड़ा असर
लगातार भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत अब तेजी से बिगड़ रही है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार: लंबे अनशन के चलते वांगचुक का वजन 8 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। उनके शरीर की मांसपेशियों (मसल मास) पर विपरीत असर पड़ रहा है और ब्लड प्रेशर (BP) का स्तर भी सामान्य से काफी नीचे आ गया है। समर्थकों द्वारा अनशन खत्म करने के अनुरोध को ठुकराते हुए वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार से आधिकारिक संवाद की प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाती।
जैसे-जैसे वांगचुक के अनशन के दिन बढ़ रहे हैं, इस आंदोलन को देश के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों से मजबूत समर्थन मिलना शुरू हो गया है। प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री जीनत अमान ने केंद्र सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को नजरअंदाज करने के बजाय संवाद के जरिए जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस छात्र आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया है। ठाकरे ने कहा कि देश के नौनिहालों और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को किसी भी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
20 जुलाई को संसद के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च की तैयारी
सरकार की ओर से बातचीत की कोई पहल न होने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने अब अपने आंदोलन को उग्र करने की रणनीति बनाई है। आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली में एक विशाल ‘चलो संसद’ मार्च निकालने का एलान किया गया है। CJP ने देशभर के युवाओं और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मानसून सत्र से पहले क्या सरकार इस गतिरोध को तोड़ने के लिए आगे आती है या फिर यह आंदोलन और बड़ा रूप अख्तियार करेगा।






















