भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
जयपुर, संवाददाता : राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लगातार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था में लापरवाही, कदाचार और भ्रष्टाचार के मामलों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सीएम ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने 1 IAS और 2 RPS (राजस्थान पुलिस सेवा) अधिकारियों समेत कुल 15 बड़े अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई को हरी झंडी दे दी है।
सरकारी भूमि आवंटन में गड़बड़ी
प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर कार्रवाई की है। एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ सरकारी भूमि को नियमानुसार नीलामी करने के बजाय ‘खांचा भूमि’ के रूप में गलत तरीके से आवंटित करने के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, दहेज उत्पीड़न के गंभीर मामले में अदालत द्वारा दोषी पाए जाने पर एक चिकित्सा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
जेल प्रशासन में सामने आई बड़ी अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए जयपुर स्थित महिला बंदी सुधार गृह की उपाधीक्षक सरोज विश्नोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विश्नोई के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वे जेल की ही एक महिला बंदी को अनाधिकृत रूप से अपने साथ रखती थीं, जिसका कार्यालय के कार्यों में सीधा हस्तक्षेप था। इसके अलावा, पैसों के एवज में बंदियों को नियमों के खिलाफ जाकर वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के गंभीर आरोप भी उन पर लगे हैं। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जयपुर से बदलकर भरतपुर कर दिया गया है।
वर्तमान में जोधपुर पुलिस आयुक्तालय में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP – साइबर क्राइम) के पद पर तैनात देरावर सिंह के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। आरोप है कि डीग जिले के कामां थाने में थानाधिकारी (पुलिस निरीक्षक) के पद पर रहते हुए उन्होंने एक हत्या के मामले की जांच में भारी लापरवाही बरती थी। अनुसंधान के दौरान कुल आठ नामजद आरोपियों में से उन्होंने केवल एक को दोषी माना और बाकी के सात आरोपियों को क्लीन चिट देकर बचाने का संदिग्ध प्रयास किया था। एक अन्य बड़े मामले में आरपीएस (RPS) अधिकारी लाभुराम विश्नोई के खिलाफ लगे आरोपों को प्राथमिक जांच में प्रमाणित मानते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच रिपोर्ट का अनुमोदन कर दिया गया है।
विश्नोई पर आरोप है कि सवाईमाधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र में तैनाती के दौरान उन्होंने बनास नदी में सक्रिय बजरी माफियाओं के खिलाफ उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना की। अवैध खनन और परिवहन को न रोकने की उनकी इस ढिलाई के कारण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई थी, जिससे स्वयं उनके और पुलिस जाब्ते की जान पर बन आई थी।
पेंशन में कटौती, वेतन वृद्धि पर रोक और रिश्वत के मामले
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के तहत प्रशासनिक अमले को सख्त संदेश देने के लिए अन्य कई वित्तीय दंड भी तय किए गए हैं: एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की 20 प्रतिशत पेंशन को हमेशा (स्थायी रूप से) के लिए रोकने का कड़ा निर्णय लिया गया है। राजस्थान सिविल सेवा के दो वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि (सालाना इंक्रीमेंट) रोकने के आदेश दिए गए हैं। भीलवाड़ा के तत्कालीन सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी राकेश खोईवाल के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होगी। साथ ही, एक आपराधिक मामले में आरोपी की मदद करने के बदले घूस मांगने के आरोप में तत्कालीन वृत्ताधिकारी (सीओ) के खिलाफ भी कोर्ट में अभियोजन चलाने की मंजूरी दे दी गई है।























