खेल और प्रयोगों से आसान होंगे गणित-विज्ञान जैसे विषय
अमेठी, संवाददाता : उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के 1570 परिषदीय विद्यालयों में अब बच्चों की पढ़ाई केवल किताबों तक ही सीमित नहीं रहेगी। विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर व व्यावहारिक बनाने के लिए ‘गतिविधि आधारित शिक्षण व्यवस्था’ को पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को खेल, प्रयोग, कहानी, कविता, समूह चर्चा और डिजिटल माध्यमों के सहारे पढ़ाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में एक सप्ताहवार गतिविधि कैलेंडर तैयार किया गया है, जिसके अनुसार ही शिक्षण कार्य संचालित किया जाएगा।
प्रार्थना सभा से ही होगी सीखने की शुरुआत
नई व्यवस्था के अंतर्गत सुबह की प्रार्थना सभा (मॉर्निंग असेंबली) को भी केवल औपचारिकता न रखकर सीखने का एक सशक्त माध्यम बनाया जाएगा। इस सभा में अब नियमित रूप से निम्नलिखित गतिविधियां शामिल होंगी: प्रेरक प्रसंग और नैतिक शिक्षा की कहानियां, सामान्य ज्ञान (जीके) और शब्दावली विकास (रोज नए शब्द सीखना), योग, प्राणायाम और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियां
कक्षाओं के भीतर पारंपरिक तरीके को बदलकर विषयों को सरल बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए कई रचनात्मक माध्यम अपनाए जाएंगे: कक्षाओं में गणितीय खेल और छोटे-छोटे विज्ञान प्रयोगों के माध्यम से कठिन सिद्धांतों को समझाया जाएगा। कहानी वाचन, कविता पाठ, चित्रकला, हस्तकला, संगीत और खेलकूद को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता और झिझक को दूर करने के लिए प्रश्नोत्तरी (क्विज), भूमिका-अभिनय (रोल-प्ले) तथा स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
हर शनिवार को मनेगा ‘प्रतिभा दिवस’
बच्चों के भीतर छिपी बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाने के लिए प्रत्येक शनिवार को स्कूलों में ‘प्रतिभा दिवस’ मनाया जाएगा। इस दिन विद्यार्थी अपनी कला, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक कौशल का प्रदर्शन सबके सामने करेंगे। इसके साथ ही, स्कूलों में मौजूद स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से बच्चों को शैक्षिक वीडियो और डिजिटल सामग्री दिखाई जाएगी, जिससे उनकी विषयों पर समझ और अधिक गहरी हो सके।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र होंगे सम्मानित
बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि इस नई शिक्षण व्यवस्था को सफल बनाने में अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समिति और ग्राम पंचायतों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। स्कूल में नियमित उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों तथा शिक्षण में नए-नए नवाचार (इन्नोवेशन) अपनाने वाले विद्यालयों व शिक्षकों को विभाग द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी।























