सपा अध्यक्ष का भाजपा पर तीखा हमला
संवाददाता,लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर जमकर निशाना साधा। देश की सुरक्षा और आंतरिक मुद्दों पर बात करते हुए सपा प्रमुख ने चीन द्वारा भारत की जमीन कब्जाने का गंभीर आरोप लगाया।
चीन से बढ़ता खतरा और सरकारों की चुप्पी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का स्टैंड हमेशा से इस मुद्दे पर बिल्कुल साफ और अडिग रहा है। सपा अध्यक्ष ने कहा, “समाजवादी पार्टी का हमेशा से यह पक्ष रहा है कि भारत को चीन से खतरा लगातार बढ़ता चला जाएगा। चीन ने सबसे ज्यादा भारत की जमीन छीनी है। चीन ने न सिर्फ आजादी के बाद, बल्कि आजादी से पहले भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है।” उन्होंने आगे कहा कि चीन लगातार भारतीय सीमाओं का उल्लंघन करता आ रहा है, लेकिन केंद्र सरकारें इस विषय पर हमेशा चुप्पी साधे रहती हैं।
बीजेपी की विचारधारा और भटकाव पर उठाए सवाल
भाजपा के इतिहास का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ दल की विचारधारा पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस समय भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था, तब उन्होंने तय किया था कि उनका रास्ता समाजवादी और सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) होगा। “बीजेपी के गठन के समय उनके पास कोई अपना समाजवादी नेता नहीं था। जब भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए, तो उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की तस्वीर लगाकर यह साबित करने का प्रयास किया था कि वे सेक्युलर मूवमेंट के सिद्धांतों पर चलेंगे। लेकिन आज की सच्चाई यह है कि बीजेपी अपने उस मूल रास्ते से पूरी तरह भटक गई है।” — अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष (सपा)
उत्तर प्रदेश के किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाया
उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि राज्य की जनता अब जमीनी स्तर पर बदलाव चाहती है। उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना की: प्रदेश के किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है और बाजारों से डीएपी (DAP) गायब है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े लोगों ने पूरी मक्का की फसल को खरीदकर खुद ही बाजार का रेट तय कर लिया, जिसके कारण आम किसानों को उनकी मक्का का सही और लाभकारी मूल्य नहीं मिल उन्होंने निष्कर्ष तौर पर कहा कि आज उत्तर प्रदेश के किसानों को जो मूलभूत सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं, वे धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही हैं।






















