दर्शन की अवधि में लगातार गिरावट
श्रीनगर : पहलगाम में हुए आतंकी हमले के डर को पीछे छोड़ते हुए इस साल अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। यात्रा के शुरुआती 6 दिनों के भीतर ही 1.42 लाख से अधिक भक्त बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन कर चुके हैं। लेकिन, आस्था के इस महाकुंभ के बीच एक बेहद चिंताजनक सवाल खड़ा हो गया है। 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के शुरू होने के महज 5 दिन के भीतर ही पवित्र हिमलिंग का आकार अत्यंत छोटा क्यों हो गया और बर्फ क्यों पिघल गई? पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अब भी यात्रा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं की संख्या के वैज्ञानिक नियमन पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
माइक्रोक्लाइमेट में बदलाव बना वजह
समुद्र तल से करीब 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिमलिंग एक प्राकृतिक ‘आइस स्टैलेग्माइट’ है। यह गुफा की छत से टपकने वाली जल की बूंदों, वहां के तापमान और नमी के विशेष संतुलन से प्राकृतिक रूप से निर्मित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गुफा के इस सूक्ष्म पर्यावरण (Microclimate) में होने वाला मामूली सा बदलाव भी हिमलिंग के आकार को सीधे प्रभावित करता है।
एक समय ऐसा था जब बाबा बर्फानी लगभग 40 से 45 दिनों तक श्रद्धालुओं को पूरे आकार में दर्शन देते थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में यह अवधि लगातार घटती देखी गई है। वर्ष 2018, 2022 और 2024 में भी पवित्र हिमलिंग समय से काफी पहले पिघल गया था। लेकिन इस बार, यानी वर्ष 2026 में, यात्रा शुरू होने के महज 5 दिनों के भीतर ही हिमलिंग का अत्यंत छोटा हो जाना और पिघल जाना अब तक का सबसे चिंताजनक घटनाक्रम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, बताए 3 मुख्य कारण
पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने इसे प्रकृति की ओर से एक गंभीर चेतावनी का संकेत माना है और इसके पीछे निम्नलिखित 3 मुख्य कारण बताए हैं: दुनिया के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में हिमालय का यह संवेदनशील हिस्सा बहुत तेजी से गर्म हो रहा है। मौसम के बदलते मिजाज और गुफा के भीतर बढ़ती उमस के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है यात्रा मार्ग पर लगातार हो रहे सड़क चौड़ीकरण, बिजली व्यवस्था, बड़े पैमाने पर सोलर लाइटिंग, ‘रेन शेल्टर’ के निर्माण और प्रस्तावित ‘रोपवे प्रोजेक्ट’ जैसी गतिविधियों से भारी मात्रा में कृत्रिम गर्मी पैदा हो रही है, जो सीधे गुफा के तापमान को बढ़ा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रतिदिन केवल 10,000 पंजीकृत श्रद्धालुओं को ही आगे जाने की अनुमति दी जाए। इसके बावजूद, हजारों की संख्या में गैर-पंजीकृत श्रद्धालु बिना अनिवार्य मेडिकल सर्टिफिकेट और बिना आरएफआईडी कार्ड के गुफा तक पहुंच रहे हैं। इतनी बड़ी तादाद में इंसानी मौजूदगी से उत्पन्न होने वाली शारीरिक गर्मी भी बर्फ को नुकसान पहुंचा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आस्था के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन को बचाना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को बिना रजिस्ट्रेशन आने वाले लोगों पर सख्त पाबंदी लगानी होगी और अमरनाथ गुफा के आसपास की कमर्शियल व कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को तुरंत नियंत्रित करना होगा।























