36 वर्षों तक रहे ईरान के सर्वोच्च नेता
नई दिल्ली। ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। सूत्रों के अनुसार यह निमंत्रण ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की ओर से भेजा गया है। हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि ईरान सरकार चाहती है कि दुनिया के प्रमुख नेता और विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करें। अयातुल्ला अली खामेनेई ने करीब 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। 86 वर्षीय खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को तेहरान पर इज़राइल और अमेरिका के हवाई हमलों के दौरान हुई थी। उस समय क्षेत्र में जारी संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका था।
4 जुलाई से शुरू होगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम
ईरान द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी। पहला श्रद्धांजलि समारोह तेहरान स्थित ग्रैंड इमाम खुमैनी मोसाला में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 6 जुलाई को तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान खामेनेई के साथ चार अन्य शहीदों—डॉ. मेस्बाह-ओल-होदा बघेरी, सैय्यदा बुशरा हुसैनी खामेनेई, ज़हरा हद्दाद अदेल और ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी—को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी। 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। वहीं इराकी धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के अनुरोध पर 8 जुलाई को अंतिम यात्रा इराक ले जाई जाएगी, जहां नजफ़ और कर्बला में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे।
9 जुलाई को मशहद में होगा दफ़न
अंतिम चरण में 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके गृहनगर मशहद में स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह तिथि इमाम सज्जाद की शहादत की रात के साथ भी मेल खाती है। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार अंतिम संस्कार कार्यक्रम में दुनिया भर के नेता, धार्मिक हस्तियां, राजनयिक और सरकारी प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। कार्यक्रम के समय और अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी जल्द जारी की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए निमंत्रण को लेकर अब भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो यह भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण राजनयिक अवसर माना जाएगा।




















