ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्रा
नई दिल्ली, संवाददाता : व्रतों में प्रमुख व्रत नवरात्रि, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष और एकादशी के माने जाते हैं। इनमें भी सबसे बड़ा व्रत एकादशी का होता है। प्रत्येक माह में दो एकादशी तिथि आती हैं। एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु इसका उचित समय पर पारण करते हैं और उससे पूर्व विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आप एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु जी के साथ 3 अन्य विशेष विग्रहों की पूजा करते हैं, तो घर में माता लक्ष्मी का स्थायी निवास हो जाता है।
1. भगवान शालिग्राम
शालिग्राम को भगवान विष्णु का साक्षात विग्रह रूप माना गया है। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के साथ इनकी विशेष पूजा और विवाह संपन्न कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम विराजमान होते हैं, वह स्थान तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है। स्कंदपुराण के कार्तिक महात्म्य में स्वयं भगवान शिव ने भी शालिग्राम की स्तुति की है। शास्त्रों के अनुसार, विष्णु जी की मूर्ति से कहीं अधिक उत्तम शालिग्राम की पूजा करना माना गया है।
2. माता तुलसी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी माता पूर्व जन्म में जलंधर की पत्नी और परम विष्णुभक्त वृंदा थीं। जब जलंधर का देवताओं से युद्ध चल रहा था, तब वह वृंदा के पातिव्रत्य धर्म के कारण अजेय बना हुआ था। समस्त देवताओं के आग्रह पर श्रीहरि विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर छल से वृंदा का व्रत भंग कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप जलंधर का वध हो सका। सच्चाई जानने पर वृंदा ने विष्णुजी को पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया था। बाद में देवताओं की प्रार्थना पर उन्होंने श्राप वापस ले लिया और स्वयं सती हो गईं। वृंदा की भस्म से ही तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। तब विष्णुजी ने उनका नाम तुलसी रखा और कहा कि मैं पत्थर (शालिग्राम) रूप में सदैव इनके साथ रहूंगा। इसी कारण तुलसी और शालिग्राम की पूजा सदैव साथ में की जाती है।
3. माता लक्ष्मी
एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन लक्ष्मी-नारायण रूप की विधिवत आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।






















