काका, लखनऊ, संवाददाता : उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के दावों को ठेंगा दिखाते हुए अकबरपुर कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर अपराध राजेश सिंह का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। संबंधित वीडियो में इंस्पेक्टर अपराध कानून-व्यवस्था का पाठ पढ़ाने के बजाए थाने पर आए नव-प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को ‘भ्रष्टाचार और घूसखोरी’ की ट्रेनिंग देते नजर आ रहे हैं।
वायरल वीडियो में कोतवाली के भीरत इंस्पेक्टर अपराध नवागत सिपाहियों को समझा रहे हैं कि आज के जमाने में वसूली कैसे की जाए ताकि नौकरी पर भी आंच न आए और जेब भी गर्म रहे। वीडियो में वे कह रहे हैं कि जो मेहनत करेगा वो आगे बढ़ेगा, अब बहुत ज़्यादा रह नहीं गया है। अब पीड़ित सीधे सीओ, एएसपी व कप्तान से बात करते हैं। गरीब बहुत अधिक हैं, पता लगा देगा सौ रुपए और बताएगा 1000। साहब यहीं नहीं रुके, उन्होंने नए पुलिसकर्मियों को चालाकी से काम करने का गुरुमंत्र देते हुए आगे कहा कि ये देखना होगा कि कहां पैसा लेना है और कहां नहीं। यह भी देखना है कि पैसा वहीं लेना है, जहां शिकायत न होने पाए।
अब वो ज़माना चला गया, कि हमको इतना ही पैसा दो तब हम तुम्हारा काम करेंगे, जो पीड़ित हंसी-खुशी ईमानदारी से दें वो रख लो। वीडियो में नवनियुक्त पुलिसकर्मी भी इंस्पेक्टर की बात में हामी भरते सुने जा रहे हैं। कानून-व्यवस्था का पाठ पढ़ाने के बजाए इन नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को भ्रष्टाचार और वसूली की ट्रेनिंग देकर फील्ड पोस्टिंग में भ्रष्टाचार करने के लिए तैयार किया जा रहा है। वीडियो कुछ महीने पहले का बताया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद इंस्पेक्टर अपराध राजेश सिंह का कहना है कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा।
इसलिए बढ़ रहा है अपराध
अंबेडकरनगर में नवागत पुलिसकर्मियों को जिस तरह भ्रष्टाचार का पाठ पढ़ाया जा रहा है, थानों में तैनाती के बाद उनका फोकस अपराध नियंत्रण पर नहीं वसूली पर होगा। प्रदेश में अपराध बढ़ने का एक प्रमुख कारण यह भी है।
ऐसे पुलिसकर्मी हों बर्खास्त
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि अगर ऐसा मामला है तो संबंधित पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करना चाहिए। ऐसे पुलिसकर्मी सीधे तौर से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
















