काका, संवाददाता, लखनऊ: पुलिस और माफिया के गठजोड़ से तेल व्यवसायी श्रवण साहू का परिवार दस साल बाद भी खौफ में है। 16 अक्टूबर 2013 को आयुष साहू के बाद उनके केस की पैरवी कर रहे पिता श्रवण साहू की एक फरवरी 2017 को हत्या ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। आयुष की हत्या माफिया अकील ने की थी और श्रवण साहू को जेल से मुन्नाबजरंगी के दो शूटरों से मरवा दिया था। सीबीआई ने पूरे मामले की जांच की और वर्ष 2024 में मुख्य हत्यारे अकील अंसारी समेत आठ आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
वारदात के बाद परिवार को दो गनर और सुरक्षा गार्द (चार पुलिसकर्मी) यह कहकर दिए गए थे कि इसका कोई सरकारी शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन अब सालभर से लगातार परिवार पर गनर का पेमेंट करने का दबाव बनाया जा रहा है। पेमेंट न करने पर एक गनर सालभर पहले हटा लिया गया है और दूसरा हटाने के लिए श्रवण साहू के बड़े बेटे सुनीत साहू को पुलिस के प्रशिक्षण एवं सुरक्षा शाखा से सालभर के भीतर तीन नोटिस भेजकर अल्टीमेटम दिया जा रहा है, जबकि श्रवण साहू की हत्या भी गनर न मिलने व सुरक्षा में लापरवाही के चलते ही हुई थी, पुलिस ने भी अपनी चूक मानते हुए बयान दिया था कि अगर उनके साथ गनर होता तो वारदात रोकी जा सकती थी।

वारदात के बाद तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया था कि उन्होंने गनर के लिए आदेश किए थे, लेकिन तत्कालीन प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) प्रथम शिशुपाल सिंह ने गनर रीलीज नहीं किया था। हत्याकांड के बाद आरआई का भी निलंबन हुआ था। सुनीत साहू तो भाई के साथ पिता के केस की भी पैरवी कर रहे हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा हटा लेने पर पूरे परिवार के लिए खतरा बन सकता है। अजय पटेल, बाबू समेत तीन हत्यारोपि कुछ महीने पहले ही जमानत पर बाहर हैं। दहशत का आलम यह है कि पूरा परिवार आज भी अपने ही घर में कैद रहने को मजबूर है।
सुनीत साहू ने बताया कि अब इस संबंध में लखनऊ से लोकसभा सदस्य व केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर सुरक्षा बरकरार रखने व गनर का पेमेंट न लेने के लिए गुहार लगाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पत्र में मैंने लिखा है कि परिवार का अकेला जीवित सदस्य हूं और मेरी जान को हर समय अपराधियों से खतरा है। हाई कोर्ट के आदेश पर शासन की ओर से नि:शुल्क दो गनर उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन अब 4.42 लाख व 1.20 लाख का सुरक्षा शुल्क जमा करने के लिए नोटिस जारी की जा रही हैं। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं सुरक्षा शुल्क दे सकूं। सुनीत ने बताया कि उनका सआदतगंज चौराहे पर चल रहा मेडिकल स्टोर भी बंद हो गया। तेल का कारोबार भी ठीक से नहीं चल रहा।
-मंत्री सुरेश खन्ना को मुख्यमंत्री से संबोधित पत्र देकर लगाई थी गुहारः
सुनीत साहू ने बताया कि इसी वर्ष 16 जनवरी को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को मुख्यमंत्री से संबोधित पत्र देकर सुरक्षा बरकरार रखने व संबंधित आदेश निरस्त कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि जिसपर सुरेश खन्ना ने अपने लेटर पैड पर नि:शुल्क सुरक्षा को बनाए रखने की सिफारिश भी की थी। बावजूद इसके कोई असर नहीं हुआ। पुलिस लाइन से बराबर नोटिस दी जा रही हैं।
-एलआईयू रिपोर्ट में भी निशुल्क सुरक्षा की सिफारिश
सुनीत ने बताया कि एलआईयू रिपोर्ट में भी निशुल्क सुरक्षा की सिफारिश की गई है। इस संबंध में पुलिस लाइन के अफ़सर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
मां को संभालने के लिए बेटी ने नहीं की शादीः
सुनीत साहू ने बताया परिवार में उनकी मां निर्मला साहू व दो बहनें अल्पना व स्वाती हैं। अल्पना की शादी पिता श्रवण साहू कर गए थे, लेकिन स्वाती भाई के बाद पिता की हत्या से इसकदर सहम गई कि वह अवसाद मे है। उसने मां की देखभाल के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और शादी नहीं करने का निर्णय लिया।
ये था पूरा मामला: आयुष के बाद पिता श्रवण की हत्या
16 अक्टूबर 2013 को सआदतगंज में मामूली विवाद में एक बीयर शाप के बाहर अकील अंसारी ने अपने साथी अजीम अंसारी उर्फ बाबू के साथ मिलकर श्रवण साहू के छोटे बेटे आयुष साहू की हत्या कर दी थी। अकील को उम्रकैद और बाबू को एक साल की सजा हुई। बाबू जमानत पर छूट गया। श्रवण साहू बेटे की हत्या के बाद उसकी केस की पैरवी में लग गए। 1 फरवरी 2017 की रात सआदतगंज इलाके में तेल व्यापारी श्रवण साहू की उनकी दुकान/घर के पास बाइक सवार बदमाशों ने गोलियों से बींधकर हत्या कर दी। श्रवण साहू अपने बेटे आयुष के कातिलों को सजा दिलाने के लिए अकेले ही कोर्ट में मजबूती से पैरवी कर रहे थे। अकील अंसारी और उसका गैंग लगातार श्रवण साहू पर गवाही बदलने और केस वापस लेने का दबाव बना रहा था। इस मामले में पुलिस और अपराधियों के बीच की गहरी सांठगांठ सामने आई थी। हत्या की पूरी साजिश जेल से रचने वाला मुख्य मास्टरमाइंड अकील अंसारी था। सत्यम पांडे व अमन सिंह वारदात को अंजाम देने वाले मुन्ना बजरंगी के शूटर थे। विवेक वर्मा, रोहित सोनी, फैसल आदि ने अकील के अन्य सहयोगी जिन्होंने रेकी करने, हथियार मुहैया कराने और साजिश में मदद की।अकील अंसारी ने जेल में रहते हुए लखनऊ पुलिस के कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर श्रवण साहू को झूठे मामलों में फंसाने और अंततः उनकी हत्या की राह आसान करने का षड्यंत्र रचा था। क्राइम ब्रांच सिपाही धीरेंद्र यादव अकील अंसारी के संपर्क में रहकर उसकी मदद करने और फर्जी केस बनाने का आरोपी था। धीरेंद्र शुक्ला (दरोगा/क्राइम ब्रांच) ने अकील के इशारे पर निर्दोषों को उठाकर फर्जी कहानी गढ़ने में संलिप्त पाया गया।शिशुपाल सिंह (रिजर्व इंस्पेक्टर) ने सुरक्षा मुहैया कराने में लापरवाही के चलते निलंबित/कार्रवाई के दायरे में आए। तत्कालीन सआदतगंज थाना प्रभारी और क्राइम ब्रांच के कई अन्य कर्मियों को निलंबित किया गया तथा सीबीआई ने अपनी जांच में उन्हें नामजद/दोषी पाया। पुलिस प्रशासन की लापरवाही और सीबीआई जांच: श्रवण साहू ने अपनी जान का खतरा बताते हुए तत्कालीन उच्च अधिकारियों (एसएसपी, डीएम, एलआईयू) से लगातार गनर और पुलिस सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई। मामले में पुलिस की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच सीबाीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में सुरक्षा न देने और लापरवाही बरतने के लिए तत्कालीन डीएम (सत्येंद्र सिंह), तत्कालीन एसएसपी (मंजिल सैनी) और सीओ एलआईयू समेत शीर्ष अधिकारियों को घोर लापरवाही का दोषी माना था।


















