संवाददाता, लखनऊ: समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पूरे एक्शन में हैं। उन्होंने देश में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्र-छात्राओं द्वारा किए गए आंदोलनों का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं की इन गंभीर समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकालना चाहिए।
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए बसपा प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की मूल्यवान राष्ट्रीय संपत्तियों और सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में बेचे जाने की नीतियों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। इसके स्थान पर सरकार को देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से लाखों पद रिक्त पड़े हैं, जिन पर बिना किसी विलंब के पेपर-लीक और भ्रष्टाचार-मुक्त पारदर्शी तरीके से समयबद्ध भर्तियां शुरू की जानी चाहिए।
मायावती ने ‘हर हाथ को काम’ के नारे को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि यदि एक गरीब या जरूरतमंद परिवार के किसी एक सदस्य को भी सरकारी नौकरी मिल जाती है, तो पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति सुधर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इससे अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवाओं को भी उचित संवैधानिक सुरक्षा मिल सकेगी। अंत में उन्होंने संसद सत्र के दौरान गतिरोध को समाप्त कर युवाओं और जनहित के इन ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर चर्चा किए जाने की अपील की है।





















