ॐ नमः शिवाय’ मंत्र से मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा
नई दिल्ली,संवाददाता : धार्मिक मान्यता के अनुसार, सप्ताह का पहला दिन यानी सोमवार देवों के देव महादेव की आराधना के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ का स्मरण करने से न केवल पूरे सप्ताह सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं। यदि आप भी अपने रुके हुए कार्यों में गति, करियर में सफलता, आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति चाहते हैं, तो सोमवार के दिन कुछ विशेष धार्मिक उपाय अपना सकते हैं। सोमवार को किए गए कुछ सरल उपाय भगवान शिव के साथ-साथ धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा भी दिलाते हैं। आइए जानते हैं सोमवार के इन कल्याणकारी उपायों के बारे में:
शिवलिंग का अभिषेक और पंचामृत पूजा
सोमवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान शिव के शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध और गंगाजल अर्पित करें। इसके साथ ही पूजा में गौरी-शंकर रुद्राक्ष अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर तैयार किए गए पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मानसिक शांति मिलती है। ध्यान रहे कि अभिषेक के बाद शिवलिंग को स्वच्छ जल से अवश्य स्नान कराएं। स्वास्थ्य लाभ, सुरक्षा और जीवन के संकटों से मुक्ति के लिए सोमवार के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। श्रद्धालुओं को कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। सोमवार को शांत चित्त से इस मंत्र का जाप करने से नकारात्मकता का नाश होता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मन एकाग्र रहता है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार के दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है। सुबह स्नान के बाद एकांत स्थान पर, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में इसका पाठ करना सबसे ज्यादा फलदायी होता है। इस स्तोत्र के अंत में एक विशेष श्लोक का उच्चारण किया जाता है: पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे। तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः॥
क्या है इस श्लोक का भावार्थ
इस श्लोक का अर्थ है कि जो भी साधक भगवान शिव की पूजा के समापन पर, विशेष रूप से प्रदोष काल में, रावण द्वारा रचित इस शिव तांडव स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उस पर भगवान भोलेनाथ सदैव अपनी कृपा बरसाते हैं। महादेव की कृपा से उस भक्त के जीवन में स्थिर लक्ष्मी (स्थायी धन-संपत्ति) का वास होता है। उसे सुख, समृद्धि, सम्मान, ऐश्वर्य और वाहन-वैभव की प्राप्ति होती है तथा उसके सभी रुके हुए कार्य सफलतापूर्वक पूरे होते हैं।
























