सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने जारी किए निर्देश
काका, लखनऊ: हाई कोर्ट ने वकीलों की गुंडागर्दी पर चिंता जताते हुए आपराधिक पृष्ठभूमि और फर्जी डिग्रियों के मुद्दे का संज्ञान लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद लखनऊ सिविल कोर्ट ने अपनी व्यवस्था में सुधार करना शुरू कर दिया है। लखनऊ में हाई कोर्ट, सिविल कोर्ट समेत सभी अदालतों में करीब 27 हजार अधिवक्ता हैं, इनमें दस हजार स्टाफ सिविल कोर्ट में है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत वकीलों को क्यूआर कोड युक्त वकालत नामा, गाड़ी के पास व बायोमीट्रिक आइकार्ड जारी किए जाएंगे। जल्द ही यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो जाएगी। इस नई व्यवस्था में नकली और असली वकीलों की पहचान भी हो सकेगी। साथ ही मुंशी और क्लर्क व अन्य स्टाफ पर भी यह व्यवस्था लागू होगी। इसी सप्ताह से ही डिजिटालाइज्ड क्यूआर कोड लागू किया जा रहा है। इससे पता चल सकेगा किस वकील का रजिस्ट्रेशन हुआ है और किसका नहीं। सिविल कोर्ट में करीब दस हजार अधिवक्ताओं का रजिस्टेशन है। इसके अतिरिक्त यहां 1,000 मुंशी, क्लर्क समेत अन्य स्टाफ भी है। सिविल कोर्ट में अलग से शिकायत पेटिका भी लगाई गई है, जिसमें कोई भी अपनी आपत्ति सीधे सेंट्रल बार के सदस्यों तक पहुंचा सकता है। अखिलेश जायसवाल ने बताया कि इंटर्नशिप करने वालों को भी बायोमीट्रिक आइकार्ड दिया जाएगा। उनके ड्रेस कोड पर भी विचार हो रहा है। अभी उन्हें काले कोर्ट-पैंट के साथ टाई अनिवार्य है।
अपराध और अपराधियों पर लगाम लग सकेगी
अखिलेश जायसवाल ने बताया कि डिजिटालाइज्ड क्यूआर कोड व्यवस्था लागू होने से अराजक तत्व कोर्ट परिसर में नहीं पहुंच सकेंगे। अपराध और अपराधियों पर लगाम लग सकेगी। मुख्तार अंसारी के करीबी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की सात जून 2023 को गोली मारकर हत्या करने वाला हमलावर वकील के भेष में ही कोर्ट परिसर में दाखिल हुआ था। इसके अतिरिक्त अभी हाल ही में फर्जी डिग्रियों से वकालत कर रहे सौ से अधिक लोगों पर बार काउंसिल ने कार्रवाई की संस्तुति की है। नई व्यवस्था में ऐसे मामलों को रोका जा सकेगा।




















