हिंदी-अंग्रेजी का ज्ञान जरूरी
अयोध्या,संवाददाता : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (न्यास) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति अयोध्या में राम मंदिर का पहला सीईओ होगा। यह नियुक्ति हाल ही में मंदिर के चढ़ावे में हुए कथित गबन और प्रशासनिक बदलावों की पृष्ठभूमि में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ट्रस्ट ने साफ किया है कि यह एक कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) आधारित नौकरी होगी, जिसकी शुरुआती अवधि तीन साल की होगी। उम्मीदवार का कार्य प्रदर्शन बेहतर होने पर इस अनुबंध को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
आवेदन के लिए प्रमुख शर्तें और योग्यताएं
न्यास द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार, इस प्रतिष्ठित पद के लिए कड़े मापदंड तय किए गए हैं: केवल 50 से 70 वर्ष की आयु के अनुभवी लोग ही इस पद के लिए पात्र होंगे। आवेदक को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का उत्कृष्ट ज्ञान होना अनिवार्य है। योग्य उम्मीदवार 18 जुलाई 2026 को शाम 4:00 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, सीईओ की भूमिका पूरी तरह से गैर-सरकारी और ट्रस्ट के अधीन होगी: सीईओ की सबसे प्राथमिक जिम्मेदारी ट्रस्ट और व्यवस्था में भक्तों के अटूट विश्वास को बनाए रखना होगा। मंदिर की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन की निगरानी करना। अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित कराना। सीईओ अपने कार्यालय के सुचारू कामकाज के लिए आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
“सीईओ की जिम्मेदारियां और शक्तियां पूरी तरह से ट्रस्ट द्वारा ही तय की जाएंगी। ट्रस्ट या सीईओ के कामकाज में कोई भी सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा। वह ट्रस्ट के एक मजबूत सहायक के रूप में कार्य करेंगे।” — नृपेंद्र मिश्रा, अध्यक्ष (राम मंदिर निर्माण समिति)
महंत दिनेन्द्र दास फ्रंट फुट पर
ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के हटने के बाद अब निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष और ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास पूरी तरह एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं। वह रोजाना सुबह मंगला आरती से लेकर शृंगार आरती तक मंदिर की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। उन्होंने खुद यात्री सुविधा केंद्र और काउंटिंग सेंटर (दानपात्र गिनती कक्ष) का दौरा कर सुरक्षा व पारदर्शिता का जायजा लिया। मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में SIT जांच और गिरफ्तारियों के बाद काउंटिंग स्टाफ में भारी कटौती की गई है।
पहले जहाँ करीब 40 लोग नोटों की गिनती में लगते थे, वहीं अब केवल 23 से 24 लोग ही आ रहे हैं। अब गिनती केवल एक शिफ्ट में (सुबह 9 से शाम 6 बजे तक) हो रही है। काउंटिंग सेंटर में सभी कर्मचारी बिना जेब वाली टी-शर्ट और पैंट पहनकर नीचे बैठकर नोट गिनते हैं। पूरे परिसर की निगरानी के लिए एक अलग कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।






















