पॉलीगॉन मैपिंग और जीपीएस तकनीक से लॉक होंगी सीमाएं
अलीगढ़, संवाददाता : अलीगढ़ जनपद में मौजूद अरबों रुपये मूल्य की शत्रु संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध कब्जों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब इन कीमती संपत्तियों का हाई-टेक तरीके से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए गृह मंत्रालय ने पॉलीगॉन मैपिंग और जियो-कोऑर्डिनेट जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिससे जमीन के वास्तविक आकार और सीमाओं का सटीक डिजिटल दस्तावेज तैयार होगा। इस कदम से भू-माफियाओं द्वारा की जाने वाली हेराफेरी या अवैध कब्जे की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
गृह मंत्रालय ने शुरू की विशेष कार्रवाई
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन शत्रु संपत्ति कार्यालय ने इस अभियान को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए विशेष सर्वेक्षक नरेंद्र पाल सिंह को नामित किया है। वह लखनऊ से अलीगढ़ पहुंचकर पूरे सर्वे और मैपिंग अभियान की कमान संभालेंगे। इस हाई-टेक मिशन की पूरी जिम्मेदारी शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय की लखनऊ शाखा को सौंपी गई है।
अलीगढ़ जिले में कुल 45 शत्रु संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 35.930 हेक्टेयर है। इन संपत्तियों का तहसीलवार विवरण इस प्रकार है: सबसे अधिक 27 संपत्तियां इस क्षेत्र में मौजूद हैं। इस क्षेत्र में 17 संपत्तियां चिन्हित की गई हैं। यहाँ केवल 1 संपत्ति दर्ज है। लंबे समय से इन बेशकीमती संपत्तियों पर अवैध कब्जे, फर्जी खरीद-फरोख्त और सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं।
कैसे काम करेगी यह आधुनिक तकनीक
पॉलीगॉन मैपिंग के तहत प्रत्येक संपत्ति के चारों कोनों को GPS आधारित जियो-कोऑर्डिनेट्स के जरिए लॉक किया जाएगा। इसके बाद इस पूरे विवरण को डिजिटल मैप पर अपलोड कर दिया जाएगा। इस अभियान के तहत हर संपत्ति का एक यूनिक ‘डीवीसी’ तैयार किया जाएगा, जिससे एक प्रमाणिक डिजिटल डेटाबेस बनेगा। मैपिंग के दौरान जिन संपत्तियों पर पहले से विवाद या अवैध कब्जे की शिकायतें लंबित हैं, उनकी मौके पर जांच कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जियो-कोऑर्डिनेट के जरिए हर संपत्ति की भौगोलिक स्थिति को हमेशा के लिए सुरक्षित करना, ताकि सीमाओं में कोई बदलाव न कर सके। भविष्य में किसी भी दस्तावेजी या कानूनी विवाद से बचने के लिए प्रमाणिक ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करना। मौके पर जांच कर विवादित मामलों की रिपोर्ट तैयार करना और लंबित मामलों का त्वरित समाधान करना।
राजस्व विभाग का मिल रहा है सहयोग
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सौरभ भट्ट ने बताया कि गृह मंत्रालय की टीम जिले में सत्यापन का कार्य मुस्तैदी से कर रही है। इस कार्य में स्थानीय राजस्व विभाग के कर्मचारियों को भी लगाया गया है ताकि आधुनिक तकनीक की मदद से जियो-कोऑर्डिनेट दर्ज करने और मैपिंग की प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।





















