अब अज्ञात शव की असली पहचान तलाश रही पुलिस
गाजियाबाद, संवाददाता : गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली में गुरुवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने परिवार, पुलिस और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। 11 दिन पहले जिस युवक को मृत मानकर उसके परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया था, वह अचानक जीवित अपने घर लौट आया। इस घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था?
क्या है पूरा मामला
वैशाली सेक्टर-5 स्थित कल्पना अपार्टमेंट निवासी गिरधर सिंह बिष्ट को 17 मई को मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 21 मई को अदालत से रिहा होने के बाद वह घर नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई और बाद में पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया। 12 जून को मसूरी क्षेत्र के नाहल झाल में एक अज्ञात शव मिला। चेहरा बुरी तरह फूल जाने के कारण पहचान संभव नहीं थी। परिजनों ने कपड़ों और शरीर पर पुराने निशानों के आधार पर शव की पहचान गिरधर के रूप में की। इसके बाद 14 जून को अंतिम संस्कार किया गया और 24 जून को तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर दी गई।
अचानक घर पहुंचा गिरधर
25 जून की सुबह करीब 9 बजे गिरधर ऑटो रिक्शा से अपने घर पहुंच गया। उसे देखते ही परिजन, पड़ोसी और स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए। घर के अंदर अपनी तस्वीर पर पुष्पमाला लगी देखकर वह नाराज हो गया। सूचना मिलने पर कौशांबी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पूछताछ में गिरधर ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद वह लोगों से पैसे मांगकर पंजाब चला गया था और पिछले 13 दिनों से डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रह रहा था। गिरधर की गुमशुदगी के बाद उसकी मां ने सात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। आरोपियों में शैलेश, सुनील, धर्मेंद्र, रविंद्र त्यागी और नैना समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। अब गिरधर के जीवित मिलने के बाद आरोपियों ने परिवार पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया है।
मसूरी पुलिस का कहना है कि अज्ञात शव की पहचान परिजनों ने स्वयं गिरधर के रूप में की थी। पुलिस ने पहचान को लेकर कई बार सावधानी बरतने की सलाह दी थी, लेकिन परिजन अपने दावे पर अड़े रहे। अब पुलिस उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान करने में जुट गई है। साथ ही, यदि जांच में फर्जी पहचान और झूठा हत्या का मामला दर्ज कराने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया और जिसकी तेरहवीं तक हो गई, आखिर वह शव किस व्यक्ति का था? अब इस रहस्य से पर्दा उठाना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।























