इस पावन तिथि पर माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु की उपासना करने से मिलता है मनोवांछित फल
नई दिल्ली, संवाददाता : सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून 2026 को मनाई जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार की पूर्णिमा इसलिए भी अत्यंत खास है क्योंकि इस दिन मूल नक्षत्र और शुक्ल योग का एक बेहद शुभ व दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों का मानना है कि ऐसा संयोग मानव जीवन में सुख, समृद्धि और संपन्नता लेकर आता है। इस पावन तिथि पर धन की देवी माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की उपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूर्णिमा तिथि का समय और शुभ मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 29 जून 2026 को प्रातः 03 बजकर 06 मिनट से।
- पूर्णिमा तिथि का समापन: 30 जून 2026 को सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर।
आर्थिक उन्नति और सुख-समृद्धि के 5 महाउपाय
यदि इस विशेष दिन पर कुछ आसान और अचूक उपाय किए जाएं, तो जीवन की तमाम आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती हैं। आइए जानते हैं इस दिन किए जाने वाले 5 बड़े महाउपायों के बारे में:
- ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना करें। पूजा के पश्चात विशेष रूप से खीर बनाकर उसमें मिश्री मिलाएं और माता लक्ष्मी को उसका भोग लगाएं। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय को करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और परिवार की आर्थिक स्थिति निरंतर मजबूत होने लगती है।
- चूंकि पूर्णिमा तिथि का सीधा संबंध चंद्रमा से माना जाता है, इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। रात के समय जब चंद्रमा उदित हो, तब एक पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा सा दूध, अक्षत (साबुत चावल) और सफेद फूल मिलाएं। इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस उपाय से मानसिक तनाव दूर होता है और मन को शांति मिलती है।
- घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुबह के समय अपने घर के मुख्य द्वार पर घी का एक दीपक अवश्य जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
- पूर्णिमा के दिन देवाधिदेव महादेव की पूजा करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर पवित्र बेलपत्र और ऋतु फल अर्पित करें। माना जाता है कि इस उपाय से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन की राह में आने वाली सभी बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।
- शास्त्रों में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक भोजन कराएं या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें। इस उपाय से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और ग्रहों के दोष शांत होते हैं।























