इस दिन कई गुना अधिक मिलता है दान का फल
नई दिल्ली, संवाददाता : हिंदू धर्म में पितरों को यानी हमारे मृत पूर्वजों को एक विशेष स्थान दिया गया है। कहते हैं जिस परिवार पर उनके पितरों की कृपा बरसती है, वहां सुख-समृद्धि और किसी चीज की कमी नहीं होती। लेकिन अगर पितर किसी कारण रूठ जाएं, तो जीवन में तमाम परेशानियां आने लगती हैं। कुंडली में लगने वाले पितृ दोष से यह पता चलता है कि हमारे पितर हमसे नाराज हैं। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए लोग तमाम तरह के उपाय करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर महीने में आने वाली अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कहते हैं अमावस्या तिथि पर हमारे पूर्वज पितृलोक से पृथ्वी लोक पर अपने परिवार वालों से मिलने आते हैं। ऐसे में जब उनके वंशज उनके नाम से श्राद्ध या दान करते हैं तो उनकी आत्मा तृप्त होती है। अमावस्या पर किया गया तर्पण, दान और श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है। अगर आप इस दिन कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो इससे पितरों की विशेष कृपा पा सकते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें अचूक उपाय
अमावस्या पर तर्पण करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए आप इस दिन सुबह स्नान के बाद एक तांबे के लोटे में साफ जल लें। उसमें गंगाजल, काले तिल, दूध और कुशा डालें। फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके इस जल को हाथों से धीरे-धीरे गिराएं। कहते हैं अमावस्या पर पितरों को अर्पित किया गया यह जल सीधे उन तक जाता है, जिससे उनकी आत्मा तृप्त हो जाती है। अमावस्या के दिन जो सात्विक भोजन तैयार किया जाता है, सबसे पहले उसके पांच विशेष अंश निकाले जाते हैं, जिसे ‘पंचबलि भोग’ के नाम से जाना जाता है। इसमें भोजन का अंश इन पांच को दिया जाता है: प्रथम अंश: गाय के लिए द्वितीय अंश: कुत्ते के लिए तृतीय अंश: कौए के लिए चतुर्थ अंश: देवताओं के लिए (इसे आप छोटी कन्याओं को खिला सकते हैं) पंचम अंश: चींटियों के लिए
अमावस्या के दिन पीपल पर जल चढ़ाने का भी विशेष महत्व है। इस दिन दोपहर या शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाएं और उसकी जड़ में कच्चा दूध और जल जरूर अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के नीचे ही सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। मान्यता है कि इससे पितर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। अमावस्या की शाम को अपने घर के मंदिर में या फिर घर के दक्षिण कोने में सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाएं। इससे पितरों का मार्ग आलोकित होता है और वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
अमावस्या के दिन दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, काले तिल, जूते या छाते का दान करें। ऐसा करने से घर के सारे कष्ट दूर होते हैं और पितरों के आशीर्वाद से जीवन खुशियों से भर जाता है। पितृ कर्म करते समय मन को पूरी तरह शांत और शुद्ध रखें। श्रद्धा पूर्वक किया गया छोटा सा प्रयास भी पितरों को परम तृप्ति प्रदान करता है।
























