डिजिटल और ऑनलाइन युग में भी बरकरार है गुरु-तत्व
नई दिल्ली, संवाददाता : भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है। “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः” जैसे सनातन श्लोक इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि गुरु ही सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक के समान पूजनीय हैं। इस वर्ष 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध गुरु के वास्तविक महत्व, जीवन में उनके प्रभाव और ज्योतिष शास्त्र में उनके स्थान को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं।
क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है: इसी पावन दिन वेदों का संकलन करने वाले और महाभारत जैसे महान ग्रंथ के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। गुरु केवल किताबी ज्ञान देने वाला शिक्षक नहीं है। गुरु वह तत्व है जो शिष्य के भीतर से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का अलौकिक प्रकाश फैलाता है। पंडित पंकज उपाध्याय के अनुसार, गुरु के बिना मनुष्य का जीवन बिना पतवार की नाव के समान है, जो लहरों में कहीं भी खो सकती है। एक सच्चा गुरु ही जीवन में नैतिकता, संयम, सेवा और सत्य का बीज बोता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, हमारी जन्म कुंडली में बृहस्पति (गुरु) ग्रह का बहुत बड़ा महत्व है। यह ग्रह जीवन में ज्ञान, सकारात्मकता, भाग्य और सुख का प्रतिनिधित्व करता है।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर स्थिति में है, तो उसे जीवन में आसानी से सही मार्गदर्शक या गुरु नहीं मिल पाते। ऐसे लोगों को सही दिशा चुनने में कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। कुंडली में बृहस्पति को मजबूत करने का सबसे आसान तरीका है—अपनी विचारधारा को सकारात्मक रखना और उन सभी लोगों के प्रति मन में कृतज्ञता का भाव रखना, जिन्होंने कभी भी हमें सही रास्ता दिखाया है।
ऑनलाइन युग में भी बरकरार है गुरु-तत्व
आज के आधुनिक और डिजिटल युग में भले ही शिक्षा और सीखने के तरीके बदल गए हों, लेकिन गुरु की महत्ता जरा भी कम नहीं हुई है। वर्तमान समय में इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से ज्ञान देने वाले ऑनलाइन शिक्षक, मेंटर्स और मोटिवेशनल स्पीकर्स भी इसी गुरु-परंपरा का हिस्सा हैं। पंडित पंकज उपाध्याय का कहना है कि स्वरूप चाहे जो भी हो, हर वह व्यक्ति जिसने हमें जीवन के किसी भी मोड़ पर सही दिशा दिखाई है, वह हमारा मार्गदर्शक और आदरणीय है। यह गुरु पूर्णिमा हमें याद दिलाती है कि आज हम जीवन के जिस भी मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने में हमारे गुरुओं के आशीर्वाद और मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है।























