7 थाने की पुलिस फोर्स,1 बटालियन पीएसी नहीं करा पाई न्यायालय में रिमांड
सुल्तानपुर, संवाददाता : सुल्तानपुर कोर्ट परिसर में आज उस समय भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब एक वकील पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में हजारों अधिवक्ता लामबंद हो गए। अधिवक्ताओं के इस जबरदस्त आक्रोश और लामबंदी के आगे जिले की पुलिस पूरी तरह बेबस नजर आई। हालात इस कदर बेकाबू थे कि भारी पुलिस सुरक्षा और छावनी में तब्दील होने के बावजूद, पुलिस आरोपियों को सिविल कोर्ट परिसर तक लाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। आखिरकार, कानूनी मजबूरी को देखते हुए सीजेएम को खुद पुलिस लाइन जाकर आरोपियों की रिमांड मंजूर करनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला
घटना बीते रविवार की रात की है। अधिवक्ता धर्मात्मा सिंह अपने कुछ मित्रों के साथ रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित लक्ष्मी होटल में भोजन करने गए थे। वहाँ किसी मामूली बात को लेकर होटल मालिक से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि होटल मालिक ने दबंगई दिखाते हुए दर्जनों लोगों को बुला लिया और हत्या की नीयत से ईंट-पत्थर, बेलचा, चिमटा और लोहे की रॉड से अधिवक्ता व उनके साथियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इस बेरहमी से की गई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे देखकर आम जनता और विधिक जगत में भारी गुस्सा फैल गया।
दो दिनों से आंदोलित थे हजारों अधिवक्ता
अपने साथी पर हुए इस जानलेवा हमले की खबर मिलते ही सुल्तानपुर के वकील आक्रोशित हो उठे। पिछले दो दिनों से जिले के हजारों अधिवक्ता लगातार आंदोलन कर रहे थे। आज मंगलवार को भी सुबह से ही सिविल कोर्ट परिसर में भारी संख्या में वकील एकजुट थे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर लामबंद थे।
पुलिस के छूटे पसीने
अधिवक्ताओं के उग्र तेवर देखकर पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। 24 घंटे के भीतर आरोपियों को अदालत में पेश करने की कानूनी मजबूरी (डेडलाइन) सिर पर थी। अगर 24 घंटे बीत जाते तो पुलिस खुद कानूनी शिकंजे में फंस सकती थी। इस संकट से बचने के लिए पुलिस के आला अधिकारियों ने कई बार प्रभारी जिला जज से अनुनय-विनय किया कि आरोपियों को कोर्ट के बजाय किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर पेश करने की अनुमति दी जाए। जब कानूनी पेचीदगियों के कारण बात नहीं बनी, तो सीजेएम नवनीत सिंह ने खुद पुलिस लाइन का रुख किया। उन्होंने वहीं अस्थाई तौर पर रिमांड की प्रक्रिया पूरी की और आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया।
वकीलों की एकजुटता की हुई जीत
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि वकीलों की एकजुटता के आगे पुलिस का पूरा अमला बौना साबित हुआ। भले ही पूरे कोर्ट परिसर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था, लेकिन वकीलों के गुस्से के आगे पुलिस आरोपियों को मुख्य कोर्ट रूम तक लाने में पूरी तरह विफल रही। फिलहाल पुलिस इस कानूनी दांव-पेंच से तो बच गई है, लेकिन शहर में इस घटना और वकीलों के दबदबे की चर्चा हर तरफ हो रही है।






















