इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ धन की देवी माता लक्ष्मी की करे विशेष पूजा
नई दिल्ली, संवाददाता : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी व्यक्ति निष्ठापूर्वक एकादशी का व्रत करता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वैसे तो प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष को मिलाकर पूरे साल में 24 एकाशदियाँ आती हैं (अधिकमास होने पर यह संख्या 26 हो जाती है), लेकिन इन सबमें सबसे बड़ी और कठिन निर्जला एकादशी मानी जाती है। इस साल यह व्रत 25 जून को मनाया जाएगा
हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी का उपवास बिना अन्न और जल के रखा जाता है। अपने इसी कठोर नियम के कारण इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। आइए जानते हैं इस महाव्रत से जुड़े जरूरी नियम, सावधानियां और पूजा विधि:
निर्जला एकादशी व्रत के मुख्य नियम
- अन्न-जल का त्याग: इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और अन्न की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। इसी कारण इसे ‘निर्जला’ व्रत कहते हैं।
- संयुक्त पूजा: इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ धन की देवी माता लक्ष्मी की भी विशेष पूजा की जाती है।
- कथा का महत्व: व्रत के दौरान निर्जला एकादशी की व्रत कथा को पढ़ना या सुनना अनिवार्य है। माना जाता है कि बिना कथा के यह व्रत अधूरा रहता है।
- पारण का समय: व्रत का पारण अगले दिन (द्वादशी तिथि को) सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है। द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना बेहद जरूरी है।
- दान का विधान: इस दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। तपती गर्मी के इस मौसम में जल का दान करना सबसे बड़ा और पुण्यकारी माना गया है।
एकादशी के दिन क्या करें
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ: इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें।
- भजन-कीर्तन: रात्रि के समय सोने के बजाय भगवान विष्णु के भजनों का कीर्तन और जागरण करना श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: पूजा के समय विष्णु जी को पीले रंग के फूल, चंदन, पंचामृत और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) जरूर अर्पित करें।
- सात्विक आचरण: मन को शांत रखें। किसी के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग न करें और न ही मन में गलत विचार लाएं।
- भूमि शयन: निर्जला एकादशी के दिन विलासिता का त्याग कर जमीन पर बिस्तर लगाकर सोना चाहिए।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
- तुलसी को न छुएं: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में न तो जल अर्पित करना चाहिए और न ही उनके पत्ते (तुलसी दल) तोड़ने चाहिए। (पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें)।
- चावल से दूरी: इस दिन घर में चावल या चावल से बनी चीजों का सेवन वर्जित होता है।
- तामसिक भोजन का त्याग: व्रत रखने वाले और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
- क्षौर कर्म निषेध: निर्जला एकादशी के दिन बाल, नाखून और दाढ़ी भूलकर भी नहीं कटवाना चाहिए।
- पारण से पहले पानी न पीएं: व्रत का संकल्प पूरा होने के बाद, द्वादशी तिथि को विधि-विधान से पारण करने के बाद ही जल का सेवन करें।





















