दोषियों पर कसेगा शिकंजा: एलडीए के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
लखनऊ, संवाददाता : लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमला ताबड़तोड़ कार्रवाई में जुटा है और एसआईटी की जांच जारी है, वहीं अब यह संवेदनशील मामला राष्ट्रीय/राज्य मानवाधिकार आयोग के चौखट पर पहुंच गया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीकांत सिंह ने इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 15 छात्रों के मामले को मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाते हुए कड़ी कार्रवाई और भारी मुआवजे की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ता की दो बड़ी मांगें
लक्ष्मीकांत सिंह ने आयोग से मांग की है कि इस भीषण लापरवाही और हादसे का शिकार हुए प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, क्योंकि यह सीधे तौर पर मासूम बच्चों के जीवन जीने के अधिकार और सुरक्षा में प्रशासनिक विफलता का मामला है। याचिका में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष को इस अवैध निर्माण और लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग उठाई गई है।
ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच प्रशासनिक हड़कंप
गौरतलब है कि सोमवार को हुए इस हादसे के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं। सीएम के निर्देश पर गठित एसआईटी ने आज सुबह ही घटनास्थल का मुआयना कर कई बड़ी कमियां पकड़ी हैं। 2016 में अवैध घोषित होने के बावजूद इस बिल्डिंग को दोबारा कागजों में वैध कैसे किया गया, अब इसकी परतें खुल रही हैं। मानवाधिकार आयोग में मामला पहुंचने के बाद अब एलडीए और जिला प्रशासन पर जवाबदेही तय करने का दबाव कई गुना बढ़ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में एलडीए के कई मौजूदा और तत्कालीन अधिकारियों पर बड़ी गाज गिर सकती है।




















