नाना-नानी से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा
भिलाई/दुर्ग: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने गुरुवार देर रात राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (नीट यूजी) पुनर-परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। इस परीक्षा में भिलाई-दुर्ग के विद्यार्थियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भिलाई के अभिनाश नाथ ने सात सौ बीस में से छह सौ इक्यावन अंक हासिल कर अखिल भारतीय रैंक एक हजार तीन सौ चौंसठ प्राप्त की और ट्विनसिटी (जुड़वां शहर) के विजेता बने। उनके बाद अणर्व अग्रवाल ने छह सौ उनतीस अंकों के साथ अखिल भारतीय रैंक तीन हजार छह सौ उनसठ हासिल की है।
वहीं नवीन गुप्ता ने पांच सौ नवासी अंक अर्जित कर चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) की सीट लगभग सुनिश्चित कर ली है। इस पुनर-परीक्षा में भिलाई-दुर्ग के करीब चौरानवे विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की है, जबकि तेईस छात्रों ने छह सौ से अधिक अंक प्राप्त कर देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश की मजबूत दावेदारी पेश की है।
अभिनाश ने सुनाई सफलता की कहानी
शहर के विजेता अभिनाश नाथ ने बताया कि पहली परीक्षा में उनके संभावित अंक सात सौ के आसपास बन रहे थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने से वे पूरी तरह टूट गए थे। परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और दोगुने समर्पण के साथ पुनर-परीक्षा में छह सौ इक्यावन अंक हासिल किए। अभिनाश ने बताया कि उनके नाना-नानी दोनों चिकित्सक थे। उन्हें मरीजों की सेवा करते देखकर ही डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। उनकी मां सस्मिता नाथ ने बेटे की तैयारी के लिए निजी विद्यालय की नौकरी तक छोड़ दी, जबकि पिता संतोष कुमार नाथ, जो डीपीएस रिसाली में शिक्षक हैं, लगातार उनका उत्साह बढ़ाते रहे। अभिनाश भविष्य में दुर्लभ बीमारियों पर शोध करना चाहते हैं और उनकी पहली पसंद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भुवनेश्वर है।
राज्य के विद्यार्थियों को प्राथमिकता का लाभ
इस वर्ष पुनर-परीक्षा का प्रश्नपत्र पहली परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन रहा। पूरे देश में उच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम रही। छत्तीसगढ़ के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के दौरान राज्य के मूल निवासी विद्यार्थियों को प्राथमिकता दिए जाने का निर्णय भी स्थानीय छात्रों के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष छत्तीसगढ़ के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में सीटें बढ़ने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग: लगभग चार सौ अठासी अंक पाने वाले विद्यार्थियों को सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय मिलने की संभावना है। अनुसूचित जाति: लगभग चार सौ अंक तक प्रवेश की उम्मीद जताई जा रही है। अनुसूचित जनजाति: तीन सौ चार अंक तक प्रवेश मिलने की संभावना है।
राज्य में पांच नए चिकित्सा महाविद्यालय शुरू होने से सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या दस से बढ़कर पंद्रह हो जाएगी और कुल सीटें एक हजार छह सौ अस्सी तक पहुंच जाएंगी। इससे स्थानीय मेधावी छात्रों के डॉक्टर बनने का सपना आसानी से पूरा हो सकेगा।























